Saturday, July 21, 2012

mai.n apane ghar me.n aayaa huu.N magar a.ndaaz to dekho 
ke apane aap ko maani.nd-e-mahamaa.N leke aayaa huu.N 
[Jagannath Azad] 
 
मैं अपने घर में आया हूँ मगर अंदाज़ तो देखो 
की अपने आप को मानिंद- ए-मेहमा लेके आया हूँ  - 
[Jagannath Azad]

Saturday, July 14, 2012

 
जिस की जैसी तबीयत थी हमें वैसा जाना , 
कहीं महबूब हुए हम, कहीं मातूब हुए. 
 
 [अनजान ]

Thursday, May 3, 2012

जाग

तेरी गुलाबी हथेलियों की मेरे सपनो में एक छाप सी ठहरी हैं, 
तेरी हर एक आहट से मेरी सांस सी ठहरी है, 
तेरी बंद अखियों को देख एक आस सी ठहरी हैं,
आ अब आ के जगा जा ठहरी हुई उस बात को जो तेरी आवज़ से ठहरी  हुई हैं।

  


Wednesday, April 11, 2012

SIMPLICITY

Simplicity is often appreciated by people but hardly approached by people. -- दीपी 

Monday, April 9, 2012

ग़ुरबत में हम हैं बैठे , पर दिल सदा तुम्हारे संग है .
ए मेरी जन्म देहि ,  तेरी याद दिल में अमर हैं .
गर मिल सकूँ न तुझ से, पर हर स्वप्न में तू ही तू हैं . 

Tuesday, April 3, 2012

रज़ा- ए - नकाब

               खुदा की रज़ा में तो हम भी राज़ी थे ,
जब तलक तूने अपनी रज़ा को उसका नकाब न था ओढ़ाया ए काज़ी . ---दीपी 

Friday, March 9, 2012

लुक्का शुप्पी


लुक्का शुप्पी खेले, मेरो नन्नो लाल
कभी उधम मचाये , कभी खूब जोर लगाये,
पर जो मैंने देखूं तो चुप हो जाय.
 कभी पानी के बुलबुले जैसा, तो कभी तितलियों
एसो हैं मेरो नटखट लाल.